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50 से अधिक कंपनियों ने अपनी आकर्षक ज्वेलरी की प्रदर्शित
जयपुर, 3 अप्रैल (हि.स.)। वैश्विक व्यापार परिदृश्य में हो रहे बदलावों के बीच रत्न और आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (GJEPC) ने इंटरनेशनल जेम एंड ज्वैलरी शो (IGJS) जयपुर 2025 का भव्य शुभारंभ किया। यह आयोजन भारत के रत्न और आभूषण उद्योग को वैश्विक स्तर पर सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह शो ऐसे समय में आयोजित किया जा रहा है, जब अमेरिकी प्रशासन ने भारतीय निर्यात पर 27 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया है।
जीजेईपीसी द्वारा आयोजित आईजीजेएस जयपुर का यह चौथा संस्करण 3 से 5 अप्रैल तक नोवोटेल, जयपुर एग्जीबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर (JECC), जयपुर में हो रहा है। यह आयोजन व्यापारिक साझेदारियों को बढ़ावा देने और भारत की वैश्विक बाजार में उपस्थिति को मजबूत करने के उद्देश्य से एक प्रमुख बी2बी प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करता है।
शो का उद्घाटन कई गणमान्य हस्तियों द्वारा किया गया, जिनमें सेवानिवृत्त मेजर जनरल अनुज माथुर, संयुक्त आयुक्त (राजस्थान सरकार) शिल्पी आर. पुरोहित, संयुक्त निदेशक एवं प्रमुख (एमएसएमई विकास संस्थान) गौरव जोशी, जीजेईपीसी के उपाध्यक्ष शौनक पारिख, क्षेत्रीय अध्यक्ष (राजस्थान) योगेंद्र गर्ग, संयोजक (कलर्ड जेम स्टोन पैनल) डी. पी. खंडेलवाल, संयोजक (चांदी पैनल) कृष्ण बिहारी गोयल, संयोजक (एसईजेड पैनल) अरविंद गुप्ता और जीजेईपीसी के सीओओ सिद्धार्थ एच. शामिल थे।
जीजेईपीसी के उपाध्यक्ष शौनक पारिख ने शो के महत्व पर जोर देते हुए कहा, IGJS जयपुर 2025 व्यापारिक सहयोग को प्रोत्साहित करने और वैश्विक संपर्कों को बढ़ाने के लिए एक उत्कृष्ट मंच प्रदान करता है। इस वर्ष, हमें 62 स्टॉलों पर 50 से अधिक कंपनियों की मेजबानी करने और 28 देशों—अमेरिका, यूके, यूरोप, ओशिनिया, रूस और CIS क्षेत्र—से 180 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खरीदारों का स्वागत करने का अवसर मिला है। यह बी2बी शो उद्योग में नए अवसर खोलता है और व्यापार को गति प्रदान करता है।
उन्होंने अमेरिकी प्रशासन द्वारा लगाए गए 27 फीसदी टैरिफ पर भी अपनी चिंता व्यक्त की, जो भारतीय रत्न और आभूषण निर्यात को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने अमेरिका से भारत और अमेरिका के बीच दीर्घकालिक व्यापार साझेदारी को बनाए रखने का अनुरोध किया और कहा कि यह टैरिफ हमारे लिए चुनौती और अवसर दोनों प्रस्तुत करता है। यह भारतीय निर्यात को प्रभावित कर सकता है, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से यह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को पुनर्गठित करने का अवसर भी हो सकता है।
जीजेईपीसी इस मुद्दे पर सभी हितधारकों से बातचीत कर रहा है ताकि अमेरिकी बाजार तक निरंतर पहुंच सुनिश्चित की जा सके और उद्योग की स्थिरता बनाए रखी जा सके। परिषद जयपुर में एक विशेष नोटिफाइड ज़ोन (SNZ) स्थापित करने की दिशा में भी कार्य कर रही है, जिससे माइनर्स से सीधे रफ स्टोन की आपूर्ति संभव हो सके। यह पहल भारत डायमंड बोर्स और सूरत डायमंड बोर्स के सफल मॉडल के अनुरूप होगी।
इसी दिशा में, 11 से 30 अप्रैल तक 'इंडिया रफ जेमस्टोन सोर्सिंग शो' (IRGSS) आयोजित किया जाएगा, जो रफ स्टोन की आपूर्ति सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। जीजेईपीसी के क्षेत्रीय अध्यक्ष (राजस्थान) योगेंद्र गर्ग ने कहा कि जयपुर जेम बोर्स को जीजेईपीसी, जयपुर ज्वैलर्स एसोसिएशन और राजस्थान सरकार के सहयोग से विकसित किया गया है। यह विश्वस्तरीय केंद्र न केवल निर्यात को बढ़ावा देगा, बल्कि 60 हजार नौकरियां सृजित करेगा, जिससे जयपुर को वैश्विक स्तर पर रत्न और आभूषण का एक प्रमुख केंद्र बनाया जा सकेगा।
IGJS जयपुर भारतीय निर्यातकों और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को एक मंच पर लाकर भारत को एक विश्वसनीय सोर्सिंग हब के रूप में स्थापित करने में मदद कर रहा है। जीजेईपीसी के एशिया-पैसिफिक, ओशिनिया, यूके, अफ्रीका, अमेरिका और यूरोप के समन्वयक जेरेमी कीट ने कहा कि हम एक तेजी से विकसित हो रहे आभूषण उद्योग में कार्य कर रहे हैं, जहां डिज़ाइन और मांग लगातार बदल रही है। खरीदारों और आपूर्तिकर्ताओं के सहयोग से ही नवाचार संभव हो सकता है।
लैटिन अमेरिका की समन्वयक अली पास्तोरीनी ने भी इस अवसर पर कहा कि यह समय चुनौतियों से भरा हुआ है, लेकिन एकजुटता ही सफलता की कुंजी है। भारत को केवल अमेरिका पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि लैटिन अमेरिका जैसे नए बाजारों की संभावनाओं को भी तलाशना चाहिए।
प्रदर्शनी के पहले ही दिन जबरदस्त व्यावसायिक गतिविधियां देखी गईं। काम्या ज्वेल्स के संस्थापक जिनेश मेहता ने कहा कि हम ग्राहक बैठकों में इतने व्यस्त रहे कि हमें लंच ब्रेक तक का समय नहीं मिला। इस आयोजन ने भारतीय रत्न और आभूषण उद्योग को वैश्विक स्तर पर सुदृढ़ करने के लिए एक मजबूत मंच प्रदान किया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर