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नई दिल्ली, 3 अप्रैल (हि.स.)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ बम ने दुनिया भर के बाजारों में हड़कंप की स्थिति बना दी है। टैरिफ का ऐलान होने के बाद से ही भारत सरकार भी एक्शन मोड में आ गई है। अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ के कारण अलग-अलग सेक्टर्स पर पड़ने वाले निगेटिव इफेक्ट को कम करने के लिए भारत सरकार ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
टैरिफ को लेकर ट्रंप की घोषणा के साथ भारतीय उद्योग और वाणिज्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी इससे भारतीय उद्योगों पर पड़ने वाले असर की समीक्षा में जुट गए हैं। केंद्र सरकार ने टैरिफ की समीक्षा के लिए एक कंट्रोल रूम बनाया है। कंट्रोल रूम में अलग-अलग मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों को लगाया गया है, जो टैरिफ के असर का अध्ययन करने के बाद उससे निपटने के उपायों पर प्रस्ताव पेश करेंगे।
बताया जा रहा है कि शुरुआती समीक्षा में इस बात की भी संभावना व्यक्त की गई है कि अमेरिका की नई टैरिफ पॉलिसी के कारण कुछ सेक्टर्स को नुकसान जरूर होगा, लेकिन कुछ सेक्टर ग्लोबल ट्रेड के लिहाज से फायदे में रह सकते हैं। टैरिफ का भारत पर पड़ने वाले असर का समग्र अध्ययन करने के लिए अलग-अलग देश पर लगाए गए टैरिफ की समीक्षा की जा रही है। इसके आधार पर इस बात का आकलन किया जाएगा कि किस सेक्टर से होने वाले निर्यात पर कम या ज्यादा असर पड़ेगा।
अमेरिका ने भारत समेत 180 देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। 180 देशों की इस सूची में कई देशों पर भारत से काफी अधिक टैरिफ लगाया गया है, वहीं कई देशों को 10 प्रतिशत टैरिफ के दायरे में रखा गया है। हालांकि न्यूनतम 10 प्रतिशत टैरिफ दायरे में रहने वाले देश अमेरिकी उत्पादों पर भी 10 प्रतिशत टैरिफ ही लगाते हैं।
जानकारों का कहना है कि भारत को अमेरिका की ओर से टैरिफ में रियायत मिलने की भी उम्मीद है। अमेरिका के टैरिफ ऑर्डर के क्लॉज 4 के तहत भारत को टैरिफ में छूट मिल सकती है। अगर भारत सरकार की ओर से टैरिफ ऑर्डर के क्लॉज 4 के तहत अमेरिका की चिंता दूर करने के कदम उठाए जाते हैं यानी कुछ चुनिंदा सेक्टर्स में अमेरिकी उत्पादों के टैरिफ में छूट दी जाती है, तो भारत को भी अमेरिका की ओर से लगाए गए प्रस्तावित टैरिफ से छूट मिल सकती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक