Enter your Email Address to subscribe to our newsletters
हुगली, 03 अप्रैल (हि. स.)। सुप्रीम कोर्ट के गुरुवार के फैसले ने पश्चिम बंगाल में 2016 की एसएससी भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्त 25 हजार 753 शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्तियों को रद्द कर दिया, जिसके बाद पूरे राज्य सहित हुगली जिले के कई हिंदी स्कूलों में हाहाकार मच गया है। हुगली जिले के हिन्दी विद्यालय पहले से ही शिक्षकों की कमी से जूझ रहे थे। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यहां शिक्षकों की और कमी हो जाएगी जिससे स्कूल चलना बहुत मुश्किल हो जाएगा।
रिषड़ा विद्यापीठ हाई स्कूल के प्रधानाचार्य प्रमोद कुमार तिवारी ने बताया कि तकरीबन ढाई हजार छात्र-छात्राओं वाले उनके स्कूल में पहले से ही शिक्षकों की भारी कमी थी। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद स्कूल के 11 शिक्षकों की नियुक्तियां रद्द हो गई हैं। इतने बड़े स्कूल को अब सिर्फ 18 शिक्षक कैसे चलाएंगे।
वहीं तकरीबन ढाई हजार छात्राओं वाले रिषड़ा विद्यापीठ गर्ल्स हाई स्कूल में पहले 14 शिक्षक थे जिनमें दो की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद रद्द हो गई है। अब वहां बारह शिक्षकों को मिलकर पूरे विद्यालय को संभालना होगा।
दो हजार छात्र छात्राओं वाले रिषड़ा विद्यापीठ यूनिट (2) में पहले 19 शिक्षक थे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद स्कूल के 12 शिक्षकों की नियुक्ति रद्द हो गई है जिससे सिर्फ सात शिक्षकों को लेकर इतने बड़े स्कूल को चलाना प्रधानाचार्य रोशन मल के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
वहीं, रिषड़ा स्वतंत्र हिंदी विद्यालय के प्रधानाचार्य बी एन झा ने बताया कि उनके विद्यालय में तकरीबन एक हजार छात्र छात्राएं हैं और 17 शिक्षक हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इनमें से तीन की नियुक्ति रद्द हो गई है।
प्रभाषनगर श्री शिव हिन्दी हाई स्कूल के प्रधानाचार्य डॉ उमेश प्रसाद सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उनके स्कूल के भी एक शिक्षिका की नियुक्ति रद्द हुई है।
बैंडेल महात्मा गांधी हिन्दी हाई स्कूल के प्रधानाचार्य विजय प्रसाद ने बताया कि उनके यहां छह शैक्षणिक और एक गैर शैक्षणिक नियुक्ति रद्द हुई है।
वहीं हुगली गौर हरि हरिजन विद्यामंदिर के प्रधानाचार्य शिव बदन यादव ने बताया कि उनके यहां दो गैर शैक्षणिक स्टाफ की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद रद्द हो गई है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय