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औरैया, 03 अप्रैल (हि.स.)। दिबियापुर नगर के पास कंचौसी मोड़ स्थित गांव लुखरपुरा में कृषि विज्ञान केंद्र गवरी विकासखंड भाग्य नगर में गुरूवार काे गेहूं की फसल कटाई के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसके साथ ही फसल कटाई में प्रयुक्त हाेने वाले उन्नत हसिया देते हुए उसके बारे में आंकलन किया।
केंद्र के वैज्ञानिक डॉ0 रश्मि यादव ने गेहूं कटाई करने वाली कृषक महिलाओं से खेत पर जाकर उन्नत हसिया के बारे में सवाल जवाब कर महिलाओं से बातचीत
की। महिला किसान राधा प्यारी ने बताया कि यह दराती हल्की चलती है इसमें फसल काटने के लिए ताकत नहीं लगानी पड़ती और अच्छीे कटाई हाेती है। गांव की मधु ने बताया कि यह दराती पहले की दराती की अपेक्षा पकड़ने में अच्छी है और फसल अच्छे से कटती है। वहीं पिंकी ने बताया कि इस दराती से कलाई व अंगुलियों में दर्द नहीं होता है। साथ ही थकान नहीं हाेती है। रामदेवी ने बताया कि यह फसल काटते समय उलझती नहीं है और धार अच्छी होने के कारण यह फसल अच्छी तरह से काटती है। नीतू सिंह ने बताया कि इसमें दांत होने के कारण फसल जल्दी कट जाती है और समय भी कम लगता है।
कार्यक्रम में उपस्थित कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ0 अंकुर झा ने महिलाओं को उन्नत खेती के बारे में बताते हुए केंचुआ खाद एवं विभिन्न कीटों के बारे में विस्तार पूर्वक चर्चा की। उन्होंने कीटों की रोकथाम के लिए जैविक कीटनाशी का प्रयोग करने के लिए कृषक महिलाओं से अपील की। उन्होंने बताया कि कीटों की रोकथाम हमें फसल बोने के पहले से ही करनी चाहिए, क्योंकि बुवाई के बाद या फसल खड़ी होने के पर कीटनाशी का प्रभाव कम होता है। यदि यही हम फसल बोने से पहले कीट उपचार कर लें तो हमारी फसल सुरक्षित रहेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील कुमार