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--वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल ₹5,568 करोड़ का संग्रहप्रयागराज, 03 अप्रैल (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की स्थानीय नगरीय निकायों ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में 44.5 प्रतिशत की अभूतपूर्व राजस्व वृद्धि दर्ज की है। इस वर्ष नगर निकायों द्वारा कुल ₹5,568 करोड़ की राजस्व वसूली की गई, जो पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में काफी अधिक है। नगर विकास विभाग के अंतर्गत आने वाले 17 प्रमुख नगर निगमों ने ₹4,140 करोड़ के वार्षिक लक्ष्य के मुकाबले ₹4,586 करोड़ की वसूली की, जिससे 11 प्रतिशत की अतिरिक्त बढ़ोत्तरी दर्ज की गई।यह जानकारी नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी पी के द्विवेदी ने दी। उन्होंने बताया कि छोटे शहरों ने बड़े शहरों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। मथुरा ने 106प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जबकि झांसी ने 85प्रतिशत की वृद्धि हासिल की। गाज़ियाबाद ने भी 72प्रतिशत की वृद्धि के साथ शानदार प्रदर्शन किया।
उन्होंने बताया कि नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव अमृत अभिजात ने कहा है कि, “यह वृद्धि हमारी नगर निकायों द्वारा अपनाई गई रणनीतिक नीतियों और डिजिटल सुधारों का परिणाम है। खासकर, गैर-कर राजस्व में 90प्रतिशत की वृद्धि यह दर्शाती है कि हमारी नगरपालिकाएं केवल पारम्परिक कराधान पर निर्भर रहने के बजाय अन्य स्रोतों से भी आय अर्जित कर रही हैं।“
कुल 17 नगर निगमों का राजस्व ₹3,140 करोड़ (2023-24) से बढ़कर इस वित्तय वर्ष ₹4,586 करोड़ (2024-25) हो गया है। कर राजस्व ₹2,235.48 करोड़ से बढ़कर ₹2,870.4 करोड़ हुआ, जो 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। वहीं, गैर-कर राजस्व में 90þ की वृद्धि हुई और यह ₹904.73 करोड़ से बढ़कर ₹1,715.27 करोड़ तक पहुंच गया।
इस वित्तीय वर्ष में राजस्व योगदान के हिसाब से लखनऊ (₹1,355.32 करोड़), कानपुर (₹720.62 करोड़) और गाज़ियाबाद (₹609.89 करोड़) शीर्ष स्थान पर रहे। गाज़ियाबाद ने 336 की अविश्वसनीय वृद्धि के साथ गैर-कर राजस्व में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। जबकि मुरादाबाद का गैर-कर राजस्व 29 प्रतिशत घटा, जो एकमात्र नकारात्मक प्रदर्शन था। उत्तर प्रदेश के 762 शहरी स्थानीय निकायों (नगर निगम, नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों) के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले चार वर्षों में राजस्व में लगातार वृद्धि हो रही है। 2021-22 में कुल राजस्व ₹2,494.42 करोड़ था, जो 2022-23 में बढ़कर ₹2,915.01 करोड़ हो गया। इसके बाद 2023-24 में ₹3,853.23 करोड़ और 2024-25 में ₹5,568 करोड़ हो गया। चार वर्षों में कुल 123प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसमें 2024-25 में अब तक की सबसे अधिक साल-दर-साल वृद्धि दर्ज की गई।
इस बढ़ती हुई राजस्व वसूली से नगरीय निकाय आत्मनिर्भर बन रहे हैं, जिससे बेहतर नागरिक सेवाएं प्रदान की जा सकेंगी। कई केंद्रीय योजनाएं जैसे कि राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम और 15वें वित्त आयोग के अनुदान प्रत्यक्ष रूप से नगर निकायों की राजस्व वृद्धि पर निर्भर करते हैं। जिसके निकायों के बढ़ते राजस्व के चलते प्रदर्शन आधारित अनुदान एवं केंद्रीय सहायता प्राप्त होंगी। अमृत अभिजात ने आगे कहा, “वित्तीय आत्मनिर्भरता नगरीय स्थानीय प्रशासन में सुधार का आधार है। अधिक राजस्व के साथ, हमारे नगर निकाय अब प्रदर्शन आधारित अनुदान और अन्य केंद्रीय सहायता प्राप्त कर सकते हैं, जिससे शहरी बुनियादी ढांचे और नागरिक सेवाओं में तेजी से सुधार होगा। हर ₹1 स्थानीय रूप से खर्च करने पर, हम कई गुना अधिक केंद्रीय सहायता प्राप्त कर सकते हैं, जिससे विकास कार्यों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।“
विशेषज्ञों के अनुसार, जिन नगर निकायों की राजस्व वसूली अधिक है, वे बेहतर शहरी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। सफाई रैंकिंग, वायु गुणवत्ता, और जीवन गुणवत्ता संकेतकों में इन शहरों की स्थिति बेहतर हो रही है। बेहतर वित्तीय स्थिति से भविष्य में बेहतर शहरी बुनियादी ढांचा, ठोस कचरा प्रबंधन, जल आपूर्ति में सुधार, और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में सुधार की उम्मीद की जा सकती है। कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश के नगर निकाय तेजी से आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं, जिससे शहरी विकास और नागरिक सेवाओं में बड़े सुधार देखने को मिलेंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र