विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस: जागरूकता एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आरपीए में हुआ आयोजन
जयपुर, 2 अप्रैल (हि.स.)। राजस्थान पुलिस अकादमी एवं सपोर्ट फाउंडेशन फॉर ऑटिज्म एंड डेवलपमेंटल डिसेबिलिटी के संयुक्त तत्वावधान में आरपीए स्थित पुलिस ऑडिटोरियम में ऑटिज्म एक एहसास-4 एक भव्य जागरूकता एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमे निदे
विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस: ऑटिज्म एक एहसास-4 एक भव्य जागरूकता एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आरपीए में हुआ आयोजन


विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस


जयपुर, 2 अप्रैल (हि.स.)। राजस्थान पुलिस अकादमी एवं सपोर्ट फाउंडेशन फॉर ऑटिज्म एंड डेवलपमेंटल डिसेबिलिटी के संयुक्त तत्वावधान में आरपीए स्थित पुलिस ऑडिटोरियम में ऑटिज्म एक एहसास-4 एक भव्य जागरूकता एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमे निदेशक आरपीए एस सेंगाथिर ने पुलिस को दिव्यांगों के प्रति मानवीय संवेदना रखने के लिए पुलिस प्रशिक्षणार्थियों को निरन्तर ट्रेनिंग दिए जाने के प्रयासों के बारे में बताया।

एडीजी एवं डायरेक्टर आरपीए सेंगाथिर ने बताया कि ऑटिज्म अर्थात स्वलीनता विश्व में सर्वाधिक तेजी से बढ़ने वाली विकासात्मक दिव्यांगताओं में से एक बन चुकी है। भारत में इसके लगभग 1.8 करोड़ प्रभावित दिव्यांग है। यह दिन संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा ऑटिज्म प्रभावित व्यक्तियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उनके अधिकारों की रक्षा करने के लिए मनाया जाता है। बुधवार को आरपीए में आयोजित कार्यक्रम में दिव्यांग बच्चों अबीर, अक्षय, अनिरुद्ध, हितेश, शिवेन, मानव, शागिल एवं ट्रेजर लैंड स्पेशल स्कूल के बच्चों ने मनमोहक प्रस्तुतियां दी।

इस कार्यक्रम में देश भर से 14 ऑटिज्म अचीवर्स अयोताक्षी, विराज, अद्वितीय भटनागर, आनंद, दीपक, वेंकटेश, आदित्य शाह, विवेक सुब्रमण्यम, विनीता सुब्रह्मण्यम, देवांश चंद्र, आशुतोष पनिकर, बेंजी अक्षय भटनागर एवं प्रणव बक्शी की उपलब्धियों के बारे में बताया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि अतिरिक्त मुख्य सचिव सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग श्री कुलदीप रांका, अतिथियों के साथ 300 से अधिक पुलिसकर्मी एवं दिव्यांग बच्चों के अभिभावक उपस्थित रहे। कार्यक्रम समापन दिव्यांग कलाकारों एवं पुलिस बैंड के द्वारा राष्ट्रीय गान के साथ किया गया।

उल्लेखनीय है कि विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस हर साल 2 अप्रैल को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर से पीड़ित लोगों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। यह दिन ऑटिज्म से पीड़ित लोगों और उनके परिवारों के सामने आने वाली चुनौतियों को उजागर करने और उन्हें समर्थन देने का एक अवसर है।

ऑटिज्म एक न्यूरोलॉजिकल और विकासात्मक विकार है जो किसी व्यक्ति के व्यवहार, संचार और सामाजिक संपर्क को प्रभावित करता है। यह एक स्पेक्ट्रम विकार है, जिसका अर्थ है कि यह प्रत्येक व्यक्ति को अलग-अलग तरीकों से प्रभावित करता है। ऑटिज्म से पीड़ित कुछ लोगों को सीखने, संवाद करने या दूसरों के साथ बातचीत करने में कठिनाई हो सकती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश