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भाेपाल, 2 अप्रैल (हि.स.)। राजधानी भोपाल के सतपुड़ा भवन में आदिम जाति कल्याण विभाग के कर्मचारियों ने बुधवार को दफ्तर में जमकर हंगामा किया। कर्मचारियों की नाराजगी कमिश्नर द्वारा एक बाबू को सस्पेंड किए जाने को लेकर थी। भवन के अंदर ही कर्मचारियों ने डेरा डाल प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। नाराज कर्मचारियों की नारेबाजी और प्रदर्शन के बीच आखिरकार अफसरों को समझौता बैठक बुलानी पड़ी। लेकिन प्रदर्शन कर रहे कर्मचारी बंद कमरे में चर्चा करने को लेकर तैयार हुए। परिस्थिति को देखते हुए पुलिस को बुलाना पड़ गया।
सतपुड़ा भवन के आदिम जाति कल्याण विभाग में यह हंगामा बुधवार सुबह दफ्तर खुलने के साथ शुरू हुआ। इसके बाद एकजुट हुए कर्मचारी, अधिकारी के विरुद्ध प्रदर्शन और नारेबाजी करने के लिए एकजुट हो गए। कर्मचारियों के विरोध को देखते हुए दोपहर 12 बजे अधिकारी इस मामले में समझौता बैठक के लिए तैयार हुए लेकिन कर्मचारी संगठन और कर्मचारी बंद कमरे में बैठक करने के बजाय खुले में चर्चा करने के लिए दबाव बनाते रहे। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि आदिम जाति कल्याण विभाग के कमिश्नर श्रीमन शुक्ला ने एक आदेश टाइप करने के लिए एक बाबू एलडीसी हर्षपाल फोन कर ऑफिस जल्दी आने लिए कहा। लेकिन किसी वजह से उन्हें पहुँचने में थोड़ी देर हो गई। जिसके बाद कमिश्नर शुक्ला ने बाबू हर्षपाल को भला बुरा बोलते हुए जमकर खरी खोटी सुनाई और उन्हें सस्पेंड कर दिया। इस बात की खबर जैसे ही अन्य कर्मचारियों को लगी तो उन्होंने इसका विरोध कर कमिश्नर के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया। विवाद बढ़ता देख कमिश्नर शुक्ला ने पुलिस बुला ली लेकिन तब भी हंगामा नहीं थमा। कर्मचारियों ने कमिश्नर श्रीमन शुक्ला के विरुद्ध नारेबाजी के बाद दफ्तर में ही गेट मीटिंग की। इस दौरान कर्मचारी नेताओं ने दफ्तर के कर्मचारियों को समझाया कि कोई कर्मचारी किसी को अपशब्द नहीं कहेगा लेकिन काम भी नहीं करेगा। अगर शाम तक कमिश्नर कर्मचारी का सस्पेंशन वापस नहीं लेते हैं तो ज्ञापन के माध्यम से आंदोलन की जानकारी दी जाएगी और फिर कर्मचारी प्रदर्शन आंदोलन तेज करेंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे