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नैनीताल, 1 अप्रैल (हि.स.)। हाई कोर्ट ने 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाले व्यक्ति के लिए सरकारी नौकरी में आरक्षण से संबंधित याचिका पर सुनवाई के बाद राज्य सरकार व राज्य लोक सेवा आयोग को विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के साथ दो सप्ताह के भीतर शपथपत्र दायर करने का निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह भी कहा है कि व्याख्याता के पद के लिए 18 अक्टूबर, 2024 के विज्ञापन के अनुसार चयन प्रक्रिया याचिका के अंतिम परिणाम के अधीन रहेगी। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 अप्रैल की तिथि नियत की है।
मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र एवं न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार टिहरी गढ़वाल निवासी दिव्यांग गौरव सिंह खरोला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 5 जून 2023 के सरकारी आदेश को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने दलील दी कि उच्च शिक्षा विभाग ने व्याख्याताओं के लिए विज्ञापन किया है, जिसमें बीए प्रभावित श्रेणी के लिए आरक्षण प्रदान नहीं किया गया है, जो कि गलत है। यह शासनादेश बेतुका और तर्कहीन है। यह सहायक प्रोफेसर (उच्च शिक्षा विभाग में) के पद के लिए आरक्षण प्रदान करता है और साथ ही व्याख्याता और सहायक शिक्षक (एलटी) (माध्यमिक शिक्षा विभाग में) के पद के लिए आरक्षण से इन्कार करता है, जबकि दोनों अनिवार्य रूप से शिक्षक हैं।
अधिनियम के अनुसार विकलांगता वाले व्यक्ति की पहचान कार्य की प्रकृति और काम करने की स्थिति के आधार पर की जानी चाहिए, जैसा कि भारत सरकार ने चार जनवरी, 2021 की अधिसूचना के अनुसार किया है। राज्य सरकार ने 51 विभागों में से केवल चार विभागों में बीए प्रभावित व्यक्तियों के लिए पदों की पहचान की है, जो याचिकाकर्ता को आरक्षण देने से इनकार करता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / लता