भगवान श्रीराम के आदर्श गुणों को आत्मसात करना ही मन की अयोध्या को सजाना है : रामदत्त चक्रधर
रायपुर, 1 अप्रैल (हि.स.)। राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में मंगलवार को एक राष्ट्रीय विचार पत्रिका समूह द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रम विमर्श में मुख्यातिथि के रूप में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शामिल हुए। समय है अब मन की अयोध
सह सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर


रायपुर, 1 अप्रैल (हि.स.)। राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में मंगलवार को एक राष्ट्रीय विचार पत्रिका समूह द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रम विमर्श में मुख्यातिथि के रूप में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शामिल हुए। समय है अब मन की अयोध्या क सजाने का विषय पर आयोजित इस विमर्श व्याख्यान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे।

सह सरकार्यवाह चक्रधर ने अपने व्याख्यान में कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों एवं गुणों को मन में आत्मसात करना ही “मन की अयोध्या” को सजाना है। उन्होंने कहा कि केवल मन ही नहीं, बल्कि अपने परिवार, समाज, गांव और राष्ट्र को भी राममय बनाना है। उन्होंने श्रीराम के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जीवन वचन-पालन, धैर्य, करुणा भाव, परामर्श, श्रेय, न्याय, अहंकार का त्याग, मित्रता और दूसरों के प्रति सम्मान एवं समभाव जैसे गुणों से परिपूर्ण था। इन गुणों को अपनाकर हम अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं।

चक्रधर ने आगे श्रीराम के जीवन से जुड़ी घटनाओं के छोटे-छोटे उदाहरणों के माध्यम से उनके आदर्श गुणों को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि श्रीराम वचन के प्रति दृढ़ प्रतिज्ञ थे।राजतिलक की घोषणा के अगले ही दिन उन्होंने पिता दशरथ द्वारा दिए गए वचन के सम्मान में सहर्ष वनवास स्वीकार किया। इसी प्रकार उन्होंने हर सुख-दुख की परिस्थिति में धैर्य बनाए रखा, कभी भी अहंकार को अपने पास नहीं आने दिया और सभी के साथ समभाव रखते हुए सम्मान का आदर्श प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि इन गुणों को आत्मसात कर हम अपने मन, परिवार, समाज और राष्ट्र को सशक्त बना सकते हैं और 2047 के विकसित भारत की परिकल्पना को साकार कर सकते हैं।

इस अवसर पर अयोध्या आंदोलन पर केंद्रित ग्रंथ राम काजु कीन्हें बिनु एवं छत्तीसगढ़ की लोक कला-संस्कृति पर आधारित पुस्तक का विमोचन मंच से किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मध्य क्षेत्र के संघचालक डॉ. पूर्णेंदु सक्सेना ने की। इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, अतुल तारे एवं यशवर्धन जैन मंच पर उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज का व्याख्यान विषय– समय है अब मन की अयोध्या को सजाने का– अत्यंत प्रासंगिक है। छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की भूमि है और भगवान श्रीराम को यहां भानजा कहा जाता है। उन्होंने कहा कि रामराज्य का अर्थ है- जनता की सेवा। हमारी सरकार सभी वर्गों को साथ लेकर जनसेवा का कार्य कर रही है। भ्रष्टाचार के प्रति हमारी नीति जीरो टॉलरेंस की है। हम श्रीराम के आदर्शों के अनुरूप रामराज्य की कल्पना को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

कार्यक्रम को विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह एवं मध्य क्षेत्र के संघचालक डॉ. पूर्णेंदु सक्सेना ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन शशांक शर्मा ने किया।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छत्तीसगढ़ प्रांत प्रचारक अभयराम, प्रांत संघचालक डॉ. टोप लाल वर्मा, उप मुख्यमंत्री अरुण साव, विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन, विधायक किरण देव, पुरंदर मिश्रा, सुनील सोनी, खुशवंत साहेब, पवन साय सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

हिन्दुस्थान समाचार / गायत्री प्रसाद धीवर