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जयपुर, 31 मार्च (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने कोविड-19 के दौरान सेवा से हटाए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को राहत देते हुए मैनेजमेंट कमेटी, भारतीय विद्या भवन, विद्याश्रम को निर्देश दिया है कि वे रामेश्वर लाल मीणा सहित अन्य को सेवा में सभी परिलाभ सहित वापस बहाल करें। हालांकि अदालत ने इस संबंध में राजस्थान गैर सरकारी शैक्षिक संस्थान अधिकरण के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें अधिकरण ने इन कर्मचारियों को बकाया वेतन का पचास फीसदी राशि का भुगतान करने को कहा था। अदालत ने कहा कि कर्मचारियों ने ऐसा कोई रिकॉर्ड पेश नहीं किया, जिससे यह साबित हो की बर्खास्तगी अवधि में वे बेरोजगार थे। ऐसे में नो वर्क-नो पे के सिद्धांत के तहत बकाया भुगतान नहीं किया जा सकता। जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने यह आदेश मैनेजमेंट कमेटी, भारतीय विद्या भवन, विद्याश्रम के निदेशक की याचिका पर दिया। मैनेजमेंट कमेटी के अधिवक्ता प्रतीक कासलीवाल ने बताया कि रामेश्वर लाल मीणा व अन्य स्कूल के हॉस्टल मैस में कर्मचारी थे। कोविड के दौरान हॉस्टल और मैस को स्थाई रूप से बंद कर दिया गया और इन कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी गई। जिसे अधिकरण में कर्मचारियों ने यह कहते हुए चुनौती दी कि उन्हें हटाने से पूर्व शिक्षा निदेशक से मंजूरी नहीं ली गई। इस पर अधिकरण ने 27 सितंबर, 2023 को आदेश देते हुए कर्मचारियों को बहाल कर उन्हें हटाने की तारीख 8 मार्च, 2021 से पचास फीसदी वेतन देने को कहा। इस आदेश को चुनौती देते हुए कहा गया कि कर्मचारियों के पदों को समाप्त करने के चलते उन्हें शिक्षा निदेशक से मंजूरी की जरूरत नहीं थी। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कर्मचारियों को सेवा में बहाल करने को कहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / पारीक