Enter your Email Address to subscribe to our newsletters
नई दिल्ली, 29 मार्च (हि.स.)। दिल्ली के साकेत कोर्ट के सेशंस कोर्ट ने दिल्ली के उप-राज्यपाल वीके सक्सेना की ओर से दाखिल आपराधिक मानहानि के मामले में दोषी करार दी गई नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर की सजा को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला टाल दिया है। आज एडिशनल सेशंस जज विशाल सिंह के उपलब्ध नहीं होने की वजह से फैसला टाला गया। इस मामले पर फैसला 4 अप्रैल को सुनाया जाएगा।
कोर्ट ने 4 मार्च को फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान वीके सक्सेना की ओर से पेश वकील ने कोर्ट से मेधा पाटकर को आत्मसमर्पण करने का निर्देश देने का आग्रह करते हुए कहा था कि पाटकर की याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। उन्होंने कहा था कि इसे खारिज किया जाना चाहिए क्योंकि मेधा पाटकर की याचिका पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं।
27 जुलाई 2024 को सेशंस कोर्ट ने ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के फैसले पर रोक लगाते हुए वीके सक्सेना को नोटिस जारी किया था। मेधा पाटकर ने ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की ओर से दी गई पांच महीने की कैद और दस लाख रुपये के जुर्माने की सजा को सेशंस कोर्ट में चुनौती दी है। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने 01 जुलाई 2024 को मेधा पाटकर को सजा सुनाई थी। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में अधिकतम सजा दो साल की होती है लेकिन मेधा पाटकर के स्वास्थ्य को देखते हुए पांच महीने की सजा दी जाती है। कोर्ट ने इस सजा पर 30 दिनों तक निलंबित रखने का भी आदेश दिया था।
कोर्ट ने मेधा पाटकर को भारतीय दंड संहिता की धारा 500 के तहत दोषी करार दिया था। कोर्ट ने कहा था कि ये साफ हो गया है कि मेधा पाटकर ने सिर्फ प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए वीके सक्सेना के खिलाफ गलत जानकारी के साथ आरोप लगाए।
25 नवंबर 2000 को मेधा पाटकर ने बयान जारी कर वीके सक्सेना पर हवाला के जरिये लेन-देन का आरोप लगाया था और उन्हें कायर कहा था। मेधा पाटकर ने कहा था कि वीके सक्सेना गुजरात के लोगों और उनके संसाधनों को विदेशी हितों के लिए गिरवी रख रहे थे। ऐसा बयान वीके सक्सेना की ईमानदारी पर सीधा-सीधा हमला था।
मेधा पाटकर ने कोर्ट में दर्ज अपने बचाव में कहा था कि वीके सक्सेना वर्ष 2000 से झूठे और मानहानि वाले बयान जारी करते रहे हैं। पाटकर ने कहा था कि वीके सक्सेना ने 2002 में उन पर शारीरिक हमला भी किया था जिसके बाद मेधा ने अहमदाबाद में एफआईआर दर्ज कराई थी। मेधा ने कोर्ट में कहा था कि वीके सक्सेना कॉरपोरेट हितों के लिए काम कर रहे थे और वे सरदार सरोवर प्रोजेक्ट का विरोध करने वालों की मांग के खिलाफ थे।
मेधा पाटकर के खिलाफ वीके सक्सेना ने अहमदाबाद की कोर्ट में 2001 में आपराधिक मानहानि का केस दायर किया था। गुजरात के ट्रायल कोर्ट ने इस मामले पर संज्ञान लिया था। 2003 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई गुजरात से दिल्ली के साकेत कोर्ट में ट्रांसफर कर दी थी। मेधा पाटकर ने 2011 में अपने को निर्दोष बताते हुए ट्रायल का सामना करने की बात कही थी। वीके सक्सेना ने जब अहमदाबाद में केस दायर किया था उस समय वे नेशनल काउंसिल फॉर सिविल लिबर्टीज के अध्यक्ष थे।
हिन्दुस्थान समाचार / संजय
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / वीरेन्द्र सिंह