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प्रयागराज, 29 मार्च (हि.स.)। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जीएसटी विभाग के एक अत्यंत महत्वपूर्ण मामले में आदेश पारित करते हुए गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी को आदेश दिया है कि न्यू ओखला डेवलपमेंट अथॉरिटी (नोएडा) से 19 लाख 22 हजार 778 रुपये वसूल करके याची सुरेंद्र गुप्ता को 15 दिन में भुगतान करे तथा एक माह में अनुपालन एफिडेविट कोर्ट में दाखिल करें। यह आदेश जस्टिस पीयूष अग्रवाल ने दिया है। याची ने सेवा प्रदाता के रूप में लीज एग्रीमेंट के तहत टैक्स समेत भुगतान करते हुए धारा 39 के तहत अपना रिटर्न भी दाखिल किया था। डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा टैक्स इनवॉइस जारी करते हुए बी टू बी के बजाय बी टू सी के गलत हेड में उक्त धनराशि को अपने रिटर्न में प्रदर्शित कर दिया गया। इस कारण वह धनराशि याची के लेजर में शो नहीं कर रही थी। इस अनियमितता के क्रम में जीएसटी विभाग ने धारा 73 की कार्यवाही करते हुए कर एवं अर्थदंड आरोपित कर दिया था। इसकी पुष्टि अपीलीय अधिकारी ने भी की। नोएडा अथॉरिटी ने इसके लिए अपने कर सलाहकार की गलती बताते हुए कहा कि उनकी वजह से ही उक्त धनराशि गलत हेड में प्रदर्शित हो रही है तथा याची ने समय रहते सूचित भी नहीं किया। याचिकाकर्ता की ओर से निखिल कुमार, नोएडा ऑथारिटी की तरफ से अंकुर अग्रवाल तथा विभाग की तरफ से अपर मुख्य स्थाई अधिवक्ता रवि शंकर पाण्डेय ने पक्ष रखा। न्यायालय ने विभागीय कार्यवाही को उचित मानते हुए कहा कि याची द्वारा समय से कर का भुगतान किया गया है तथा डेवलपमेंट अथॉरिटी की वजह से ही याची पर अनावश्यक कर एवं अर्थदंड आरोपित किया गया है। ---------------
हिन्दुस्थान समाचार / रामानंद पांडे