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नैनीताल, 24 मार्च (हि.स.)। नैनीताल हाईकोर्ट ने देहरादून के डोईवाला क्षेत्र में बहने वाली सुशुवा सहित अन्य नदी में भारी मशीनों से खनन की अनुमति दिए जाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद खनन से सम्बंधित अधिकारियों को मंगलवार को कोर्ट में तलब किया है।मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र व न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार देहरादून निवासी वीरेंद्र कुमार व अन्य ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि राज्य सरकार ने देहरादून के डोईवाला क्षेत्र में बहने वाली सुशुवा सहित अन्य नदी में खनन कार्य करने के लिए भारी भरकम मशीनों की अनुमती दे दी है। भारी मशीनों द्वारा खनन करने पर नदी का जल स्तर नीचे गिर रहा है साथ ही उनकी कृषि योग्य भूमि भी प्रभावित हो रही है। उनको सिंचाई के लिए पानी तक नही मिल पा रहा है। यही नही भारी मशीनों द्वारा खनन कार्य करने के कारण स्थानीय लोग बेरोजगार हो गए है। पहले उनको नदी में खनन करने से रोजगार मिल जाया करता था लेकिन जब से सरकार ने भारी मशीनों को खनन की अनुमति दी है तब से स्थानीय लोग बेरोजगार हो गए हैं। जनहित याचिका में उन्होंने कोर्ट से प्रार्थना की कि भारी मशीनों से खनन कार्य करने पर रोक लगाई जाए, उनकी कृषि योग्य भूमि को बचाया जाय और खनन कार्य मे स्थानीय लोगो को प्राथमिकता दी जाए ना कि मशीनों को। सुनवाई पर राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि बारिश के दौरान नदी में भारी मात्रा में शिल्ट, गाद, बड़े बोल्डर व अन्य आ जाते है। जिसकी वजह से नदी का रास्ता अवरुद्ध होकर अन्य जगह बहने लगता है। इसको हटाने के लिए मेन पावर की जगह मशीनों की जरूरत पड़ती है। इसलिए सरकार ने जनहित को देखते हुए मशीनों का उपयोग करने की अनुमति दी। ताकि नदी अपनी अविरल धारा में बहे। लेकिन इसका विरोध करते हुए याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया कि इसका मुख्य कारण नदियों पर हुए अवैध खनन है।
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हिन्दुस्थान समाचार / लता