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बेहतर वित्तीय प्रबंधन से बिहार का राजकोषीय घाटा निर्धारित सीमा के अंदर रहने का अनुमान:सुशील

By HindusthanSamachar | Publish Date: Feb 11 2019 5:04PM
बेहतर वित्तीय प्रबंधन से बिहार का राजकोषीय घाटा निर्धारित सीमा के अंदर रहने का अनुमान:सुशील

रजनी

पटना, 11 फवरी ( हि.स. ) ।बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि राज्य का राजकोषीय घाटा निर्धारित अधिसीमा 3 प्रतिशत के अंदर ही वर्ष 2017 -18 में 2.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

बिहार विधानसभा में 2018 -19 का आर्थिक सर्वेक्षण पेश करने के बाद संवाददाता सम्मेलन को सोमवार को संबोधित करते हुए सुशील कुमार मोदी ने कहा कि बेहतर वित्तीय प्रबंधन के कारण बिहार का राजस्व अधिशेष बरकरार है और इसमें दोगुने से भी अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि केरल ,पंजाब, आंध्र प्रदेश जैसे 8-9 ऐसे राज्य हैं जहां राजकोषीय घाटा है और 14वें वित्त आयोग की अनुशंसा पर केंद्र सरकार ऐसे राज्यों को एक लाख 40,000 करोड़ रुपए का भुगतान कर रही है।

उन्होंने कहा कि अपने बेहतर वित्तीय प्रबंधन से बिहार अन्य राज्यों से काफी आगे है । उन्होंने कहा कि पिछले 4 वर्षों में बिहार में 70% राजस्व में वृद्धि हुई है ।उद्यमिता के क्षेत्र में हुए विकास की चर्चा करते हुए सुशील मोदी ने कहा कि कृषि आधारित उद्योगों में बिहार में 19.2% की वृद्धि हुई जबकि राष्ट्रीय औसत 3% का ही है। इसी तरह गैर कृषि क्षेत्र में बिहार में 6.9% की वृद्धि दर्ज की गई जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह वृद्धि 4.9% है। वाहनों की खरीद को विकास का एक सूचक बताते हुए उन्होंने कहा कि वाहन की खरीद में वर्ष 2016 -17 की तुलना में वर्ष 2017-18 में 17% की वृद्धि हुई। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016- 17 में 7 लाख 64 हजार वाहनों की बिहार में खरीद हुई थी जबकि वर्ष 2017 -18 में यह बढ़कर 11 लाख 18 हज़ार हो गई ।

वित्त मंत्री ने बताया कि वर्ष 2017-18 में दुपहिया वाहनों की खरीद में 20% की वृद्धि दर्ज हुई। इस अवधि में बिहार में नौ लाख 29 हजार दुपहिया वाहनों की बिक्री हुई और 23000 ट्रक बिके । ऊर्जा के क्षेत्र में हुए विकास की चर्चा करते हुए सुशील मोदी ने कहा कि इस क्षेत्र में गत 7 वर्षों में बिहार में 165% की वृद्धि हुई है । बिजली की चरम मांग और उपलब्धता वर्ष 2011 -12 में 1712 मेगावाट थी जो वर्ष 2017 -18 में बढ़कर 4535 मेगावाट हो गई । इसके साथ ही प्रति व्यक्ति बिजली की खपत में भी विगत 7 वर्षों में राज्य में 100% से भी अधिक की वृद्धि हुई है। वर्ष 2011 -12 में प्रति व्यक्ति खपत 134 किलोवाट प्रति घन्टा थी जो वर्ष 2017-18 में बढ़कर 280 किलोवाट प्रति घंटा हो गई । वित्त मंत्री ने कहा कि बिहार में वर्ष 2017-18 में कुल जमा राशि में पिछले वर्ष की अपेक्षा 7.2% की वृद्धि हुई जबकि राष्ट्रीय स्तर पर इस अवधि में बैंकों में जमा 6.8% बढ़ा। इसी तरह ऋण में भी बिहार में 11.7% की वृद्धि हुई जबकि राष्ट्रीय स्तर पर केवल 9.5% की वृद्धि दर्ज की गई।

मानव विकास को किसी भी राज्य के विकास का प्रमुख बिंदु मानते हुए सुशील मोदी ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण राज्य के लोगों की लाइफ एक्सपेक्टेंसी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2006 से 2016 के बीच लोगों की लाइफ एक्सपेक्टेंसी लगभग 3 साल बढ़ी है। संस्थागत प्रसव की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2011- 12 में संस्थागत प्रसव में 16.3% की वृद्धि हुई थी जो वर्ष 2016- 17 में बढ़कर 16.37% हो गई।

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