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रूपाणी सरकार से नाराज भाजपा के 23 विधायक

By HindusthanSamachar | Publish Date: Jun 28 2018 7:29PM
रूपाणी सरकार से नाराज भाजपा के 23 विधायक
नई दिल्ली, 28 जून (हि.स.)। गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी से भाजपा के लगभग 23 विधायक नाराज हैं। इनमें से मधु श्रीवास्तव, केतन ईमानदार और योगेश पटेल ने तो बाकायदा बैठक करने के बाद खुलेआम कहा कि राज्य के नौकरशाह उनकी कोई बात नहीं सुन रहे हैं। जनता के काम के लिए जाने पर घंटों बाहर बैठाते हैं। यही नहीं जनता के किसी काम के बारे में पूछने पर, पत्र लिखने पर जवाब तक नहीं देते हैं। इन तीनों विधायकों ने यह कह और सनसनी फैला दी है कि उनके अलावा और 20 विधायक नाराज हैं। यानि कुल 23 विधायक नाराज हैं। उनका कहना है कि उनकी नाराजगी न तो पार्टी से है न ही किसी मंत्री से है। हमारी नाराजगी है प्रशासन से, नौकरशाहों से है। हम जन प्रतिनिधि हैं। उस जनता के लिए जिम्मेदार हैं, जिसने हमें चुनकर भेजा है। उनके कार्य के लिए हम जब कुछ कहते हैं और प्रशासन, नौकरशाही उसे सुन ही नहीं रही है, तो हमारे पास आवाज उठाने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। इस मुद्दे को लेकर हम लोग दिल्ली जायेंगे, संगठन व सत्ता प्रमुख के सामने उठायेंगे । इस बारे में भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि इन 3 विधायकों द्वारा यह कहना कि राज्य के नौकरशाह उनकी कुछ सुनते ही नहीं। मिलने जाने पर इंतजार कराते हैं। जनता के किसी कार्य के लिए पत्र लिखते हैं, तो जवाब ही नहीं देते। यह साबित करता है कि राज्य में या तो मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की कोई हनक नहीं है या उन्होंने इन 23 विधायकों के विधानसभा क्षेत्र के जिलाधिकारियों व अन्य अधिकारियों को निर्देश दे रखा है कि इन विधायकों का कोई काम नहीं करना। मिलने आवें तो बाहर बैठाकर इन्तजार कराना। यह करके इन्हें बेइज्जत करना है। इनकी औकात बताना है। वैसे तो मुख्यमंत्री विजय रूपाणी अभी इजरायल गये हैं खेती करने के तरीके सीखने, देखने, समुद्र के खारे पानी को पीने लायक बनाने का इजरायली पद्धति जानने। लेकिन 26 जून को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह गुजरात में ही थे। उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों के लिए बैठक भी किया था। उसमें इन विधायकों ने अपनी बात क्यों नहीं रखी। या इन विधायकों को लगता है कि रूपाणी तो केवल मुखौटा हैं। कमान तो शाह के हाथ में है। बाकी नौकरशाही की कमान भी शाह व मोदी के हाथ में है। जो कुछ होता है उन्हीं के इशारे पर होता है। ऐसे में इन विधायकों का नौकरशाहों के विरूद्ध दिल्ली में आला कमान से फरियाद करने जाने की बात कहना बहुतों को जंच नहीं रहा है। लोग आशंका व्यक्त कर रहे हैं कि यह सब विजय रूपाणी को मुख्यमंत्री पद से हटाने के लिए हो रहा है। लेकिन अमित शाह तो गुजरात में मुख्यमंत्री बनकर आने वाले नहीं हैं क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उनको लोकसभा चुनाव तक तो भाजपा अध्यक्ष पद से हटने नहीं देंगे। इस बारे में इंडियन एक्सप्रेस समूह के गुजराती अखबार समकालीन के सम्पादक रहे वरिष्ठ पत्रकार हरि देसाई का कहना है कि इन विधायकों में से कईयों को मंत्री पद का प्रलोभन दिया गया होगा। लेकिन समस्या यह है कि कितने को मंत्री बनायेंगे। कुछ को बनायेंगे। बाकी को क्या देंगे। इसलिए जो आवाज उठाते हैं उनमें से तमाम के विरूद्ध कई केस दर्ज हैं, उसे दिखाकर डराया जाता है। इसके अलावा कांग्रेस के विधायकों को भी तोड़ने की बात फैलाई जाती है। राजकोट के पास का एक ओबीसी विधायक है बावड़िया। उस पर कांग्रेस डोरे डाल रही है। इसी तरह से इन्द्रनील राजगुरू हैं। जो रूपाणी के विरूद्ध कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे, लेकिन हार गये। उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। लेकिन वह कहे हैं कि वह भाजपा में नहीं जा रहे हैं। जबकि भाजपा वाले कह रहे हैं कि वह भाजपा में आ सकते हैं। इस तरह कांग्रेस वाले भाजपा पर और भाजपा वाले कांग्रेस के विधायकों, नेताओं पर डोरे डाल रहे हैं। एक अन्य वरिष्ठ गुजराती पत्रकार का कहना है कि जहां तक रूपाणी सरकार के गिरने का सवाल है, तो यदि भाजपा के 23 विधायक टूट कर अलग हो जायें तो सरकार गिर जायेगी। लेकिन ऐसा तो है नहीं कि इनके टूट कर अलग होने से कांग्रेस की सरकार बन जाएगी। क्योंकि या तो भाजपा के दो तिहाई विधायक टूटकर कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनावें या भाजपा के 23 विधायक इस्तीफा दे दें, तभी रूपाणी सरकार गिरेगी। हिन्दुस्थान समाचार /कृष्णमोहन/राधा रमण
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