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भिखारी ठाकुर के सहयोगी रामचन्द्र मांझी को मिलेगा संगीत नाटक अकादमी सम्मान

By HindusthanSamachar | Publish Date: Jul 11 2018 12:12PM
भिखारी ठाकुर के सहयोगी रामचन्द्र मांझी को मिलेगा संगीत नाटक अकादमी सम्मान

छपरा, 11 जुलाई (हि.स.)। भोजपुरी के शेक्सपीयर कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर के सहयोगी कलाकार नर्तक रामचन्द्र मांझी को 'संगीत नाटक अकादमी सम्मान 2017' प्रदान किए जाने की घोषणा को भोजपुरी भाषा-भाषियों ने सराहा है| उनका कहना है कि देश-विदेश में प्रसिद्ध इस कला को पहली बार राष्ट्रीय फलक पर यह सम्मान मिलने जा रहा है।

दरअसल रामचंद्र मांझी की पहचान भिखारी ठाकुर के नाच पार्टी के (पुरुष नर्तक) के रूप में है और भिखारी ठाकुर भी खुद पुरुष नर्तक थे और लौंडा नाच पार्टी चलाते थे। इस घोषणा से देश के कई रंगकर्मियों, विद्वानों, सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है।

लोगों का कहना है कि यह सम्मान भिखारी ठाकुर को सम्मानित करने जैसा है। आज से 3-4 वर्ष पहले तक रामचंद्र मांझी को बहुत कम ही लोग जानते थे। पहली बार वह चर्चा में तब आए, इस सम्मान के लिए उनका नामांकन हुआ। दो बार लगातार असफल होने के बाद तीसरी बार उन्हें चुना गया है।

रामचंद्र मांझी भोजपुरी भाषा-भाषी क्षेत्र की नाच परंपरा को जीवंत बनाने के लिए पूरी तरह से समर्पित रहे हैं, लेकिन गुमनाम कलाकार रहे हैं। भिखारी ठाकुर से प्रशिक्षित एवं उनके साथ काम कर चुके जीवित बचे कलाकारों में से रामचंद्र मांझी सबसे वरिष्ठ ऐसे कलाकार हैं, जो अपने जीवन के 93 वसंत देख चुके हैं। फिर भी लगातार भिखारी ठाकुर की नाच मंडली (अब भिखारी ठाकुर रंग मंडल) में भिखारी ठाकुर द्वारा रचित हर नाटकों में मुख्य भूमिका निभाते हैं।

'बिदेसिया' नाटक से प्राप्त की ख्याति

रंगमंडल में रामचंद्र मांझी, नारी की भूमिका करने के लिए प्रसिद्ध माने जाते हैं। इन्होंने 'बिदेसिया' नाटक में रखेलिन के किरदार को अपने अभिनय, गायकी एवं नृत्य से एक ऐसी ऊंचाई प्रदान की है जिसके आस-पास फटकना भी आज के रंगकर्मियों के लिए चुनौती है। सारण जिले के एक छोटे से गांव तुजारपुर में जन्में रामचन्द्र मांझी दलित समुदाय से आते हैं|

उनके जन्म का कोई लिखित प्रमाण नहीं है पर मतदाता पहचान पत्र के अनुसार उनका जन्म 1930 में हुआ है जबकि रामचंद्र मांझी अपनी स्मरण पर जोड़ देते हुए खुद को 93 वर्ष का बताते हैं। वह 12 वर्ष की उम्र में ही भिखारी ठाकुर की नाच पार्टी से जुड़े थे। वह बताते हैं कि भिखारी ठाकुर से पहले उन्होंने गांव के ही दीनानाथ मांझी की नाच मंडली में नाच का प्रशिक्षण लिया और नाचना-गाना शुरू कर दिया था। उसके बाद उन्हें भिखारी ठाकुर की नाच पार्टी में शामिल होने का न्योता मिला।

उन्होंने आंगिक-वाचिक अभिनय सहित धोबिया नाच, नेटुआ नाच, गजल, कव्वाली, निर्गुण, भजन, दादरा, खेमटा, कजरी, ठुमरी, पूर्वी, चइता गायन का गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के पश्चात भिखारी ठाकुर द्वारा रचित सभी नाटकों में मुख्य कलाकार के रूप में अपनी भूमिका प्रदान की। रामचंद्र मांझी अब तक भिखारी ठाकुर के एक-एक नाटकों की हजारों-हजार प्रस्तुतियां देश-विदेश के विभिन्न समारोहों एवं गांव के शादी-विवाह तथा त्योहारों में कर चुके हैं।

राजनीतिक हस्तियों के सामने किया कला का प्रदर्शन

रामचंद्र मांझी अब तक मोतीलाल नेहरू, प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, जगजीवन राम, जयप्रकाश नारायण, लालू प्रसाद यादव, नितीश कुमार, राबड़ी देवी, शरद यादव, रामविलास पासवान तथा दारोगा राय जैसे देश के बड़े राजनेताओं के समक्ष अपनी प्रस्तुतियां दे चुके हैं। पर समाज में आज भी रामचंद्र मांझी की इस कला को सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता है।

समाज ने नहीं की कला की कद्र

रामचंद मांझी हीं क्यों, इस विधा से जुड़े हर कलाकार को समाज एवं परिवार में हेय दृष्टि से देखा जाता है। रामचंद्र मांझी कहते हैं कि मुझे यह बताते हुए मुझे अपने समाज पर शर्म आ रही है कि मेरे नाच को आज तक मेरे परिवार के लोगों ने नहीं देखा।

भिखारी ठाकुर के नाटकों बिदेसिया में रखेलिन व प्यारी सुंदरी, गबरघिचोर में गलीज बहू, बेटी-बेचवा में हजामिन, पिया निसइल में रखेलिन गंगा-स्नान में मलेछू बहु, पुत्र-बध में छोटकी, भाई-बिरोध में छोटकी, कृष्णलीला में यशोदा,ननद-भाउजाई में भाउजाई, बिधवा-बिलाप में विधवा स्त्री की भूमिका के लिए जाने जाते हैं। मांझी का पिछले तीन वर्ष से संगीत नाटक अकादमी सम्मान के लिए नामिनेशन हो रहा था परंतु सफलता तीसरे वर्ष मिली।

तीन बार हो चुका है नॉमिनेशन

संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 2015 के लिए पहली बार जब रामचंद्र मांझी का नॉमिनेशन हुआ था, उस वर्ष यह सम्मान बिहार से रंगकर्मी परवेज अख्तर एवं रामचंद्र सिंह को मिला। रामचंद्र मांझी जब दूसरी बार नॉमिनेट हुए तब, यह सम्मान बिहार से लोक गायक ब्रजकिशोर दुबे को प्राप्त हुआ। अंततः तीसरी बार में रामचंद्र मांझी इस पुरस्कार के लिए चुने गए हैं।

हिन्दुस्थान समाचार/गुड्डू

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