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‘नार्थ ईस्ट फेस्टिवल-2018’ का हुआ आगाज

By HindusthanSamachar | Publish Date: Oct 11 2018 8:44PM
‘नार्थ ईस्ट फेस्टिवल-2018’ का हुआ आगाज
सुभाषिनी
नई दिल्ली, 11 अक्टूबर (हि।स।)। इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला (आईजीएनसीए) केन्द्र में नार्थ ईस्ट फेस्टिवल (एनईएफ) का शुभारंभ 26 अक्टूबर से हो रहा है। यह फेस्टिवल तीन दिन तक (26 से 28 अक्टूबर तक) आयोजित किया जा रहा है। फेस्टिवल का उद्घाटन लोकसभा सासंद जितेन्द्र सिंह करेंगे। यह जानकारी एनईएफ के संस्थापक श्यामकानू ने आज यहां संवाददाताओं को दी।
 
श्यामकानू ने बताया कि इस बार समारोह में नेशनल रजिस्टर सिटीजनशिप (एनआरसी) पर एक सेमिनार भी होगा। सेमिनार का विषय ‘एनआरसीःअनट्रूथ, हॉफ-ट्रूथ एण्ड ट्रूथ’ रखा गया है। इसके अलावा इस बार समारोह का मुख्य आकर्षण पूर्वोत्तर राज्यों (अरुणाचल, मेघालय, सिक्किम, मिजोरम, त्रिपुरा, मणिपुर, असम, नगालैंड) के 40 से ज्यादा व्यंजनों का स्टाल लगाया जाएगा। उन्होंने बताया कि कूजिन्स नॉनवेज व वेज दोनों ही होंगे। साथ ही पूर्वोत्तर राज्यों की सब्जियों और फलों का भी स्टाल लगाया जाएगा।

फैशन शो से भरी होगी शाम
 
श्यामकानू ने बताया कि समारोह में फैशन शो से भरी शाम भी आयोजित की जाएगी, जिसमें पूर्वोत्तर राज्य की जाने माने आठ डिजाइनर याना गोबा, वर्षा आदित्य सिंह, रुपर्ट, इस्केप इंगमोइया, संघमित्रा फूकोन, बॉम्पी रिराम, जागृति फूकान, ख्रीलेसियी परिधानों का प्रदर्शन करेंगे। परिधानों का प्रदर्शन पूर्वोत्तर राज्यों की 30 जानी मानी मॉडल्स करेंगी।

कला एवं फोटो प्रदर्शनी
 
समारोह में कला एवं फोटो प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी, जिसमें पूर्वोत्तर राज्यों के कलाकार अपने कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।

रंगारंग प्रस्तुतियों से भरा होगा दिन
 
समारोह में पूर्वोत्तर राज्यों के पारंपरिक गीत संगीत एवं नृत्य का कलाकारों द्वारा प्रस्तुति दी जाएगी। समारोह में होजागिरी नृत्य, नागा वारियर डांस, बांबू डांस और पूर्वोत्तर नृत्यों की प्रस्तुति दी जाएगी।

रॉक बैटल प्रतियोगिता
 
हर साल की तरह इस बार भी रॉक बैटल प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। इस बार दिल्ली कॉलेज के शीर्ष 25 बैंड इसमें भाग लेंगे।
 
श्यामकानू ने बताया कि नार्थ इस्ट फेस्टिवल लगातार पांच सालों से राजधानी में सफल आयोजन कर रहा है। यह कार्यक्रम दिल्ली वासियों के लिए सबसे बड़ा संगीत व सांस्कृतिक उत्सव बन गया है। दिल्ली में आयोजित करने का उद्देश्य है कि यहां हर तरह के रंग देखने को मिलते हैं। साथ ही पूर्वोत्तर राज्यो में पर्यटन को बढ़ावा देना है और भारत के बाकी हिस्सों के बीच के अंतर को खत्म करना है।
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