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पुलिस के रवैये और हत्या के विरोध में गया में पटवा समाज नाराज, बुकरों की हड़ताल

By HindusthanSamachar | Publish Date: Jan 11 2019 2:37PM
पुलिस के रवैये और हत्या के विरोध में गया में पटवा समाज नाराज, बुकरों की हड़ताल

पंकज 

गया , 11 जनवरी (हि.स.)। बिहार में गया जिले के  मानपुर स्थित पटवा टोली के हजारों पावरलूम और हैंडलूम शुक्रवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण बंद हो गए।पटवा समाज अपनी एक  बेटी की निर्दयतापूर्वक हत्या से काफी मर्माहत करने वाली है। वहीं, पटवा समाज गया पुलिस के आनर किलिंग  के आरोप में लड़की की मां आशा देवी, पिता तोराज पटवा और तोराज के मित्र लीला पटवा की गिरफ्तारी से आक्रोशित है।पटवा समाज का आरोप है कि गया पुलिस आनन-फानन में इस हत्या को 'आनर किलिंग' बता कर मामले को अलग रुप देने का प्रयास कर रही है।

उल्लेखनीय है कि 28 दिसंबर को युवती लापता हो गई थी। बुनियादगंज थाना में 04 जनवरी को युवती के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज की गई। 06 जनवरी को पीड़ित परिवार के घर से कुछ दूरी पर उसका शव मिला।सिर धड़ से अलग था।छाती तेज धारदार हथियार से रेती हुई थी।घटना के विरोध में मंगलवार और बुधवार को पटवा समाज के लोगों के साथ- साथ कई संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने कैंडल मार्च निकालकर विरोध व्यक्त किया।

एसएसपी राजीव मिश्रा ने गुरुवार को प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि प्रथम दृष्टया मामला आनर किलिंग का प्रतीत होता है। गया पुलिस पूर्व में भी कई बहुचर्चित कंडों में अनुसंधान के \"स्तर\" को लेकर विवादों में रही है। पिछले साल डीएम आवास के सामने और एसएसपी और पुलिस लाइन के पास भीषण डकैती हुई थी। पोद्दार डकैती कांड में गया पुलिस प्रेस कांफ्रेंस कर कांड का उद्भेदन होने का दावा कर चुकी है लेकिन पीड़ित परिवार से लूटा गया एक भी रुपया, जेवरात और अन्य सामान की बरामदगी छह महीने बाद भी नहीं हुई है। इसके पूर्व परैया थाना क्षेत्र अंतर्गत मां-बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना हुई।

गया पुलिस ने सोनडीहा गांव के दो युवकों को मां- बेटी सामूहिक दुष्कर्म कांड का मुख्य आरोपी बताते हुए गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। सीआईडी के मार्गदर्शन में वैज्ञानिक अनुसंधान के आधार पर सामूहिक दुष्कर्म कांड में कमलदाह गांव के कई अपराधी पकड़े गए। पटवा समाज की बेटी हत्याकांड में गया पुलिस शव बरामदगी के पांच दिन बाद भी घटनास्थल ढूंढ नहीं पाई है जहां युवती का गला काटा गया था।पुलिस हत्या में इस्तेमाल हथियार भी बरामद करने में असफल रही है। हत्या कर ठिकाने लगाने के लिए किस वाहन या कैसे शव को पीड़ित परिवार के घर से कुछ दूरी पर लाया गया? इस बिंदु पर भी पुलिस अनुसंधान में कहने को कुछ नहीं है। यह महज संयोग है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार या किसी वीवीआईपी के आगमन के पूर्व ऐसे बहुचर्चित मां-बेटी सामूहिक दुष्कर्म कांड, पोद्दार डकैती कांड और अब पटवा टोली के युवती हत्याकांड में उद्भेदन का दावा पुलिस का रही है। हिन्दुस्थान समाचार

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