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दलंगमुख से वायुसेना के बमबारी प्रशिक्षण क्षेत्र को हटाने की मांग

By HindusthanSamachar | Publish Date: Jun 12 2018 9:05PM
दलंगमुख से वायुसेना के बमबारी प्रशिक्षण क्षेत्र को हटाने की मांग
इटानगर, 12 जून (हि.स.)। अरुणाचल प्रदेश कमले जिले के दलंगमुख सर्किल के लोगों ने मंगलवार को भारतीय वायुसेना के बमबारी अभ्यास क्षेत्र के विरुद्ध प्रदर्शन किया। लोगों का आरोप है कि वायुसेना के बमबारी और अभ्यास के कारण क्षेत्र में रहने वाले स्थानीय लोगों के जीवन और संपत्तियों को काफी नुकसान हो रहा है। प्रदर्शन में स्थानीय इलाकों के हजारों लोगों ने हिस्सा लेते हुए मंगलवार को वायु सेना के खिलाफ नारेबाजी की। साथ ही एक शांति मार्च भी निकाला। लोगों ने मांग की कि वायुसेना अपने बमबारी और अभ्यास क्षेत्र को उनके इलाके से किसी दूसरे इलाके में अतिशीघ्र स्थानांतरित करे। सोशल एक्टिविस्ट बिनी रंजन ने मीडिया के साथ बातचीत करते हुए कहा कि उक्त क्षेत्र के लोगों की यह काफी लंबित मांग है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय वायु सेना, जिसने 1968 में दोलंगमुख और अरुणाचल प्रदेश सरकार ने लोगों को सूचित किए बिना भूमि के पट्टा समझौते पर हस्ताक्षर कर दिया था। समझौते की 1975 में समीक्षा की गई। वायु सेना युद्ध की तरह काम कर रही है और हमारा जीवन भयानक स्थिति में है। यहां के लोग जीवित रहने के लिए अपने आपको असहज महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई घरों और पालतू पशु इस अभ्यास की चपेट में आ चुके हैं। इस प्रशिक्षण बमबारी में 1992 में हमारे स्थानीय निवासी बिनी टैबॉम की मौत हो गई थी लेकिन आज तक उनके पारिवार के सदस्यों को किसी भी तरह का कोई मुआवजा नही मिला। आईआईएफ के लड़ाकू विमानों द्वारा किए गए अभ्यास और बमबारी के कारण कई पालतू जानवरों की भी मौत हुई है। उन्होंने बताया कि लड़ाकू विमान असम के तेजपुर बेस कैंप से उड़ान भरते हैं और इलाके में बमबारी का अभ्यास करते हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही मेंं 8 जून, 2018 को रियुंग गांव की निवासी बिनी टोडम को बमबारी के कारण काफी गहरी चोट लगी थी, जिसका फिलहाल तमो रिबा इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड मेडिकल साइंस (टीआरआईएचएमएस) नहरलागुन में इलाज चल रहा है। इससे कुछ दिन पहले कुल चार मिथुन की भी बमबारी के दौरान मौत हो गयी थी। क्षेत्र के 12 गांव के लगभग 10 हजार लोगों जीवन खतरे में है। इस मुद्दे पर कई बार राज्य और केन्द्र सरकार कों ज्ञापन सौंपा जा चुका है, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। रंजन ने कहा कि अगर सरकार का रवैया ऐसा ही रहा तो गांव वाले अपने जीवन व संपत्ति के लिए बड़ा अन्दोलन करने के लिए मजबूर होंगे। हिन्दुस्थान समाचार/ तागू/ अरविंद/दधिबल
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