राष्ट्रीय

निरर्थक मुद्दे उठाने के कारण ही हारी कांग्रेस :रामबहादुर राय

पीके अरविंद
नई दिल्ली, 23 मई (हि.स.) । लोकसभा चुनाव के परिणाम से यह स्पष्ट हो गया है कि भाजपा-नीत राजग केंद्र में दोबारा सरकार बनाएगा। जबकि कांग्रेस-नीत संप्रग पिछले चुनाव की तरह इस बार भी तीन अंकों का आंकड़ा नहीं छू सका है। अन्य विपक्षी दलों की हालत भी कमोबेश कांग्रेस जैसा ही है।
लोकसभा चुनाव के परिणामों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय ने कहा कि नेतृत्व का अभाव और जनता का मूड जाने बगैर निरर्थक मुद्दे उठाना ही विपक्ष की हार का प्रमुख कारण रहा। इसके अलावा मोदी की दूरदर्शी सोच और प्रभावी नेतृत्व ने भी विपक्ष को कामयाब नहीं होने दिया। 
वरिष्ठ पत्रकार  राय ने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व में बनने वाले गठबंधन के घटकदल यह तय नहीं कर पाए कि उनका नेता कौन होगा? इसके अलावा भी विपक्ष की हार के कई कारण रहे। कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने देश की जनता का मूड जाने बगैर मनगढ़ंत खबरों के आधार पर सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ अभियान चलाया, कांग्रेस ने पहले असहिष्णुता का मुद्दा उठाया, उसके बाद नोटबंदी, जीएसटी और किसानों का मुद्दा उठाया, जो जनता को प्रभावित नहीं कर सके।
उन्होंने कहा कि नकदी के चलन से कालेधन का प्रभाव बढ़ता है। मोदी सरकार की नोटबंदी के कारण नकदी का चलन कम हुआ है, जिससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा है। कांग्रेस की करारी हार के बाद पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के इस्तीफे की पेशकश पर रामबहादुर राय ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि सिर्फ इस्तीफे की पेशकश से क्या होता है, बेहतर होता कि राहुल गांधी देश की जनता से क्षमा मांगते। यह भी कम हास्यास्पद नहीं है कि वे इस्तीफे की पेशकश भी अपनी मां सोनिया गांधी के समक्ष कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस कार्यसमिति के समक्ष करना चाहिए था। दरअसल, वे ऐसा करके ‘फैमिली फर्स्ट’ की अपनी सोच को ही उजागर कर रहे हैं। राहुल यदि सचमुच में कांग्रेस को मजबूत बनाना चाहते हैं तो महात्मा गांधी से प्रेरणा लेते हुए पहले अध्यक्ष पद छोड़नी होगी। विपक्ष को लामबंद करने के लिए प्रयासरत रहे टीडीपी अध्यक्ष एन. चंद्रबाबू नायडू से जुड़े एक सवाल पर राय ने कहा कि नायडू सिर्फ अपना अस्तित्व बचाने के लिए यह सब कर रहे थे। वे मोदी को सबक भी सिखाना चाहते थे, जिसमें सफल नहीं हुए। सफल भी कैसे होते? मोदी सरकार ने आंध्रप्रदेश को नायडू की अपेक्षा से अधिक निधि दी, लेकिन वे सिर्फ विशेष राज्य के दर्जे की अपनी मांग पर ही अड़े रहे। 
 वरिष्ठ पत्रकार राय ने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के खिसकते जनाधार का कारण उनकी भेदभावपूर्ण नीतियों का माना है। उन्होंने कहा कि ममता ने राज्य में जो भी योजनाएं लागूं कीं, उनको हिंदू-मुस्लिम के आधार पर आगे बढ़ाया। जबकि केंद्र की मोदी सरकार ने सबका साथ सबका विकास के आधार पर सभी नीतियों का कार्यान्वयन किया। जैसे- उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना आदि। 
हिन्दुस्थान समाचार.
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